नई दिल्ली, । दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में एक अनोखा स्टार्टअप चर्चा का विषय बना हुआ है। 28 वर्षीय रिया शर्मा ने अपने स्टार्टअप “फिर से फैशन” के जरिए पुराने और फटे हुए कपड़ों को डिजाइनर बैग में बदलने का काम शुरू किया है। यह पहल न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद कर रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी दे रही है।
रिया ने बताया, “हर साल भारत में लाखों टन कपड़े कचरे में फेंक दिए जाते हैं। मैंने सोचा कि क्यों न इस कचरे को कुछ उपयोगी और खूबसूरत में बदला जाए।” उनके स्टार्टअप में पुराने साड़ियों, जींस और कुर्तों को रीसायकल करके स्टाइलिश टोट बैग, स्लिंग बैग और लैपटॉप बैग बनाए जा रहे हैं। इन बैग्स की खासियत यह है कि हर बैग का डिजाइन अनोखा है, क्योंकि यह पुराने कपड़ों के पैटर्न पर निर्भर करता है।
इस स्टार्टअप ने अब तक 500 से ज्यादा बैग बेचे हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इनकी मांग बढ़ रही है। रिया के साथ 15 स्थानीय कारीगर काम कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। एक कारीगर, शबनम बेगम, ने कहा, “यह काम मेरे लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने का मौका भी है।”
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना की है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने कहा, “ऐसी पहल टेक्सटाइल कचरे को कम करने में मदद कर सकती हैं। अगर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, तो यह फैशन उद्योग के लिए एक मॉडल बन सकता है।”
हालांकि, रिया के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पुराने कपड़ों को इकट्ठा करना और उन्हें साफ करके उपयोगी बनाना एक लंबी प्रक्रिया है। फिर भी, रिया का कहना है कि वह इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं।
“फिर से फैशन” के बैग्स की कीमत 300 रुपये से शुरू होती है और डिजाइन के आधार पर 1500 रुपये तक जाती है। रिया का सपना है कि वह अपने बैग्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ले जाएं और भारत को सस्टेनेबल फैशन का हब बनाएं।