लोकतंत्र भास्कर
मेरठ। हरिवंशपुराण की कथा के सातवें दिन कथाव्यास प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी ने हरिवंशपुराण में समुद्र मन्थन, वराह द्वारा पृथ्वी के उद्धार और दक्ष के यज्ञ के विध्वंस की कथा की अन्य पुराणों से भिन्नता को प्रस्तुत किया।
उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति के क्रमिक विकास को बताया। वराह के अर्थ को स्पष्ट किया। वराह ने चुन-चुन कर चारों वर्णों, छन्दों, तत्त्वों, अक्षरों आदि का विभाजन किया। वराह ने ही पृथ्वी के समतल, पहाडों, नदियों आदि विविध रूपों का निर्माण किया। इन्द्र द्वारा पर्वतों के पंख काटने का वैज्ञानिक रहस्य प्रकट किया। हरिवंशपुराण में युद्ध को भी एक यज्ञ के रूप प्रस्तुत किया गया है। त्रिपाठी जी ने काल के भी स्वरूप को स्पष्ट किया। कल की कथा में पौण्ड्रकवध आदि का वर्णन होगा।