
नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट फॉर कनफ्लिक्ट मैनेजमेंट (आईसीएम) के एक ताजा अध्ययन ने भारत में आतंकवाद और उग्रवाद की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। अध्ययन के अनुसार, भारत के नौ राज्य—जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब और त्रिपुरा—आतंकवाद और उग्रवादी गतिविधियों के लिए अति संवेदनशील हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 1988 से 2019 तक 56,000 आतंकी वारदातें दर्ज की गईं। इस दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने 23,386 आतंकियों को ढेर किया, लेकिन इस संघर्ष में 14,930 आम नागरिकों और 6,413 जवानों ने अपनी जान गंवाई।
जम्मू-कश्मीर: आतंक का केंद्र
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का इतिहास लंबा और दुखद है। दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (एसएटीपी) के आंकड़ों के मुताबिक, 1988 से अब तक हुए हमलों में मरने वालों में 47% आतंकी थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने मार गिराया। हालांकि, 40% मृतक आम नागरिक थे, जो इस हिंसा का शिकार बने। 6 मार्च 2000 से 22 अप्रैल 2025 तक, जम्मू-कश्मीर में 12,037 आतंकी घटनाओं में 4,980 निर्दोष लोगों की जान गई।
2022 में राजौरी और ऊधमपुर जैसे जिलों में नागरिकों की हत्या ने यह संकेत दिया कि जिन क्षेत्रों को पहले आतंकवाद-मुक्त घोषित किया गया था, वे फिर से पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों के निशाने पर हैं। हाल ही में पहलगाम में हुए हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया, जो आतंकियों की नई रणनीति को दर्शाता है।
टीआरएफ: नया खतरा
पहलगाम हमले के पीछे आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का हाथ था, जो अनुच्छेद-370 हटने के बाद 2019 में उभरा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टीआरएफ का मुख्य निशाना आम नागरिक हैं। 2020 से अब तक इस संगठन ने 32 हमले किए, जिनमें 48 लोगों की जान गई। हालांकि, सुरक्षा बलों ने टीआरएफ के 41 आतंकियों को मार गिराया है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने टीआरएफ को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान की ओर से लगातार घुसपैठ और सीजफायर उल्लंघन ने स्थिति को और जटिल बनाया है। 2001 से 2019 तक, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में 11,000 बार घुसपैठ की, जिसके परिणामस्वरूप 12,000 आतंकी वारदातें हुईं। पिछले 16 वर्षों में पाकिस्तान ने 9,014 बार सीजफायर का उल्लंघन किया, जिसमें 59 भारतीय नागरिक, 57 सैनिक और 42 अर्धसैनिक बलों के जवान शहीद हुए।
नौ राज्यों में उग्रवाद का खतरा
जम्मू-कश्मीर के अलावा, पूर्वोत्तर के आठ राज्य—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब और त्रिपुरा—भी उग्रवादी और आतंकी गतिविधियों से जूझ रहे हैं। इन राज्यों में हर साल सैकड़ों हमले होते हैं, जिनमें आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान जाती है। अध्ययन के अनुसार, इन क्षेत्रों में उग्रवादी संगठनों की सक्रियता और स्थानीय समस्याओं ने स्थिति को और गंभीर बनाया है।
आगे की चुनौतियां
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कदम उठाए हैं, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों का लगातार सक्रिय रहना, नए संगठनों का उभरना और पहले से सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों में हिंसा का फिर से सिर उठाना चिंता का विषय है। सरकार और सुरक्षा बलों को न केवल आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की जरूरत है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाली पर भी ध्यान देना होगा।




