नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक हिंदी दैनिक के संवाददाता राघवेंद्र बाजपेई की निर्मम हत्या को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्वत: संज्ञान (Suo-motu Cognizance) लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। इस हत्याकांड पर चिंता जताते हुए प्रेस काउंसिल ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रेस काउंसिल की सख्ती, जवाबदेही तय करने की मांग
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष स्मृति रंजन देसाई ने इस मामले को पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, और पत्रकारों पर होने वाले हमले प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
उन्होंने यूपी सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), सीतापुर के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) से इस हत्याकांड की पूरी जानकारी और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
क्या है पूरा मामला?
सीतापुर जिले में कार्यरत पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई एक हिंदी दैनिक के लिए रिपोर्टिंग कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वह लगातार स्थानीय प्रशासन, भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों पर खबरें लिख रहे थे, जिससे कुछ प्रभावशाली लोगों में नाराजगी थी। इसी बीच, अज्ञात बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी।
हालांकि, अभी तक इस हत्या के पीछे की असल वजह सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस इसे व्यक्तिगत रंजिश, पेशेगत दुश्मनी या किसी संगठित अपराध से जुड़ा मामला मानकर जांच कर रही है।
पत्रकार संगठनों और विपक्ष का आक्रोश
इस घटना के बाद देशभर के पत्रकार संगठनों और विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
पुलिस और प्रशासन की सफाई
सीतापुर पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, राज्य सरकार ने भी प्रेस काउंसिल को भरोसा दिलाया है कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पत्रकारों की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल
राघवेंद्र बाजपेई की हत्या ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। भारत में हाल के वर्षों में पत्रकारों पर हमले और उनकी हत्याओं के मामले बढ़े हैं। प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है।
आगे क्या?
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर राज्य सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो प्रेस काउंसिल इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी हस्तक्षेप की मांग कर सकती है।
(यह खबर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और अन्य उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर लिखी गई है।)