संभल में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ा एक्शन

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। चंदौसी के वारिस नगर इलाके में नगर पालिका की 6 बीघा जमीन पर बनी एक मस्जिद और 33 मकानों को अवैध घोषित करते हुए जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने इन्हें गिराने के आदेश जारी किए हैं। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों में विरोध और समर्थन की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन ने कार्रवाई के लिए बुलडोजर तैयार कर लिया है और जल्द ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने शिकायत की कि वारिस नगर में नगर पालिका की 6 बीघा जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। आरोप था कि इस जमीन पर एक मस्जिद के साथ-साथ तीन दर्जन से ज्यादा मकान बना दिए गए हैं। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और मौके पर जांच के लिए टीम भेजी गई। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह की अगुआई में प्रशासनिक अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश की और रिकॉर्ड खंगाले।
जांच के दौरान पता चला कि कुल 35 बीघा जमीन में से 6 बीघा नगर पालिका की संपत्ति है, जिस पर अवैध निर्माण कर लिया गया है। टीम ने मकान मालिकों से जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज मांगे, लेकिन किसी के पास कोई वैध कागजात नहीं मिला। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया, “गाटा संख्या (जमीन का आधिकारिक रिकॉर्ड) के आधार पर यह साफ हो गया कि यह सरकारी जमीन है। इसके बावजूद यहां मस्जिद और 30 से ज्यादा मकान बना लिए गए, जो पूरी तरह अवैध है।” जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इन निर्माणों के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और निर्माण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यह नगर पालिका की संपत्ति है और इसे हर हाल में खाली कराया जाएगा।” डीएम ने तत्काल प्रभाव से मस्जिद और 33 मकानों को ढहाने के आदेश जारी किए। साथ ही, उन्होंने पूरे जिले में सरकारी जमीन पर अन्य अवैध कब्जों की पहचान कर उन्हें हटाने की चेतावनी भी दी। प्रशासन अब इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए बुलडोजर और पुलिस बल की तैनाती की तैयारी कर रहा है।
प्रशासन के इस फैसले से वारिस नगर में हलचल मच गई है। कुछ लोग इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। एक स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा, “अगर जमीन सरकारी है तो उसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। प्रशासन का फैसला सही है, ताकि सरकारी संपत्ति का सही इस्तेमाल हो सके।” वहीं, कुछ लोग इस कार्रवाई के खिलाफ हैं। मोहम्मद अली नाम के एक निवासी ने तर्क दिया, “अगर यह अवैध था तो प्रशासन पहले क्यों नहीं जागा? अब लोगों के घर तोड़े जाएंगे, यह ठीक नहीं है।” इलाके में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो सकती है। इससे पहले प्रभावित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा सकता है, लेकिन चूंकि जांच में अवैध कब्जे की पुष्टि हो चुकी है, इसलिए कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है। जिलाधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि संभल जिले में अन्य इलाकों में भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतों की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह कार्रवाई संभल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मुहिम का हिस्सा बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से जहां एक ओर सरकारी संपत्ति की रक्षा होगी, वहीं दूसरी ओर अवैध निर्माण करने वालों में डर भी पैदा होगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में सामाजिक तनाव और विरोध की चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
संभल प्रशासन की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बनी रहेगी। सबकी नजर इस बात पर है कि यह फैसला जमीन पर कैसे लागू होता है और इसका स्थानीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।