मुंबई का लीलावती अस्पताल देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है। लेकिन हाल ही में इस अस्पताल को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने चिकित्सा क्षेत्र और चैरिटेबल ट्रस्ट के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1,500 करोड़ रुपये के घोटाले में पूर्व ट्रस्टियों पर फंड की हेराफेरी, जालसाजी और काले जादू जैसी गुप्त प्रथाओं में शामिल होने के आरोप लगे हैं। बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे खुला घोटाले का पर्दाफाश?
लीलावती अस्पताल का संचालन लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LKMMT) करता है। ट्रस्ट के स्थायी ट्रस्टी प्रशांत मेहता के अनुसार, जब अस्पताल के वित्तीय रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट किया गया तो चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं। इसमें फंड डायवर्जन, फर्जी निवेश, मेडिकल उपकरणों की अवैध खरीद, टैक्स चोरी और गुप्त प्रथाओं का खुलासा हुआ।
प्रशांत मेहता ने बताया कि ट्रस्ट ने इन आरोपों के आधार पर बांद्रा पुलिस स्टेशन और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। इस घोटाले में ज्यादातर आरोपी अनिवासी भारतीय (NRI) हैं, जिनका संबंध दुबई और बेल्जियम से बताया जा रहा है।
घोटाले से जुड़े बड़े आरोप और वित्तीय अनियमितताएं
1. 85 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी – आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
2. 1200 करोड़ रुपये की हेराफेरी – मेडिकल उपकरणों की अवैध खरीद और फर्जी बिलिंग के माध्यम से घोटाले का आरोप।
3. 500 करोड़ रुपये की कर चोरी – आयकर विभाग ने पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ टैक्स चोरी के मामले में कार्रवाई शुरू की है।
4. 59 करोड़ रुपये के आभूषणों की चोरी – गुजरात स्थित एक वॉल्ट से कीमती आभूषण और वस्तुओं की गुप्त रूप से निकासी।
5. 44 करोड़ रुपये की कानूनी फीस में हेराफेरी – फर्जी कानूनी फीस के नाम पर पैसे का गबन।
6. 11.52 करोड़ रुपये की जालसाजी – मेफेयर रियल्टर्स और वेस्टा इंडिया जैसी कंपनियों में ट्रस्ट के पैसे का अवैध निवेश।
अस्पताल में काले जादू का सनसनीखेज दावा
इस घोटाले में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में काले जादू और तांत्रिक अनुष्ठान किए गए।
शिकायत के अनुसार:
✅ अस्पताल परिसर में मानव बाल मिले।
✅ सात खोपड़ी वाले सात से ज्यादा कलश बरामद हुए।
✅ तांत्रिक अनुष्ठानों के सबूत मिले, जिससे स्टाफ और मरीजों में दहशत।
महाराष्ट्र एंटी-ब्लैक मैजिक एक्ट के तहत बांद्रा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। इससे यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टियों ने अस्पताल की जमीन का किसी अन्य मकसद से इस्तेमाल किया था?
सत्ता संघर्ष और घोटाले की जड़ें कहां हैं?
लीलावती ट्रस्ट के संस्थापक किशोरी मेहता 2002 में बीमार पड़ गए थे और इलाज के लिए विदेश चले गए। इस दौरान उनके भाई विजय मेहता ने ट्रस्ट का संचालन अपने हाथ में ले लिया।
➡ आरोप है कि विजय मेहता ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपने बेटे और भतीजों को ट्रस्ट में शामिल कर लिया और किशोरी मेहता को ट्रस्टी पद से हटा दिया।
2016 तक यह विवाद चलता रहा, और 2024 में किशोरी मेहता का निधन हो गया। उनके बेटे प्रशांत मेहता जब स्थायी ट्रस्टी बने, तो उन्होंने ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की और उन्हें इस घोटाले का पता चला।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 20 वर्षों में पूर्व ट्रस्टियों ने ट्रस्ट के पैसों का दुरुपयोग किया और इसे अपने निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल किया।
घोटाले का असर: मरीजों और अस्पताल की साख पर संकट
लीलावती अस्पताल को देश के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में गिना जाता है, जहां हर साल हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। लेकिन इस घोटाले ने अस्पताल की साख और मरीजों के भरोसे को गहरा झटका दिया है।
➡ ट्रस्ट की आंतरिक लड़ाई का सीधा असर अस्पताल की सेवाओं पर पड़ रहा है।
➡ अस्पताल का प्रशासनिक ढांचा सवालों के घेरे में है।
➡ नए निवेश और फंडिंग को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या होगा आगे?
इस मामले की जांच में शामिल हैं:
✅ मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW)
✅ प्रवर्तन निदेशालय (ED)
✅ आयकर विभाग (IT)
✅ महाराष्ट्र पुलिस – एंटी ब्लैक मैजिक एक्ट के तहत कार्रवाई
➡ अब सवाल यह है कि क्या इस घोटाले में लिप्त लोग सलाखों के पीछे जाएंगे, या मामला सालों तक कानूनी उलझनों में अटका रहेगा?
➡ क्या लीलावती अस्पताल अपनी प्रतिष्ठा फिर से हासिल कर पाएगा, या यह घोटाला अस्पताल की विश्वसनीयता पर स्थायी दाग छोड़ देगा?
अब यह देखना होगा कि कानून इस मामले में क्या कदम उठाता है और अस्पताल की प्रतिष्ठा को कैसे बहाल किया जाता है।