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Sunday, March 8, 2026
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मुहब्बत में मासूमियत से लेकर मोह के मकड़जाल को दर्शाता लियाकत मंसूरी का उपन्यास ‘मेरी कहानी और शहनाज़’

उपन्यास समीक्षा: मेरी कहानी और शहनाज़

मुहब्बत में मासूमियत से लेकर मोह के मकड़जाल को दर्शाता लियाकत मंसूरी का उपन्यास ‘मेरी कहानी और शहनाज़’

-‘मेरी कहानी और शहनाज’ उपन्यास में ऐसी कहानियां परोसी गई कि फिल्म निर्माण भी संभव

-पत्रकार से लेखक बनें लियाकत मंसूरी का दूसरा उपन्यास है मेरी कहानी और शहनाज़

सपना सीपी शाहू ‘स्वप्निल’

इंदौर। ‘मुझे उड़ने दो’ उपन्यास से साहित्यिक लेखन शुरू करने वाले पत्रकार लियाकत मंसूरी का यह चौथा नॉवेल है “मेरी कहानी और शहनाज़”। यह ऐसी पुस्तक है जो पढ़ने पर पाठकों को शुरु से आखिरी तक बांधे रखती है। पत्रकार से लेखक बनें लियाकत मंसूरी ने अपने उपन्यास के पात्र शहनाज़ के साथ जीवन जीते हुए, उससे वार्तालाप करते हुए ऐसी कहानियों का गुलदस्ता पाठकों को थमाया है, जिसमें पवित्र प्रेम से प्यार में पाप तक, इश्क में मासूमियत से लेकर मुहब्बत के मकड़जाल, रिश्तों में भोली इंसानी भावनाओं से लेकर जीवन की जटिलताओं पर प्रकाश डाला है।

श्री मंसूरी जी की लिखी कहानियां जीवन के आस-पास घटित हुई सी लगती है, क्योंकि यह उनके पत्रकारिता के पेशे के दौरान अपराध जगत में घटित हुई सत्य घटनाओं से प्रभावित है, लेखक की अपनी एक उम्दा लेखन शैली है, जिसमें वे कहानियों को रोचक मोड़ देते है। कहानियां पढ़कर हम कह सकते हैं कि वे अपनी लेखन शैली से प्रेमचंद जी की कहानियों जैसे घुमाव लाते हैं। सरल भाषा व संवाद शैली का उपयोग कर वे पाठकों को कहानियों से जोड़ लेते हैं। वैसे इन कहानियों में प्रेमचंद जी की कहानियों से भिन्नता भी है कि उनकी कहानियां अलग-अलग होती जाती है पर मंसूरी जी की कहानियां अलग-अलग होकर भी एक दूजे से जुड़ी हुई सी लगती है। शहनाज़ का पात्र और लेखक की उससे घनिष्ठता भी कहानियों में तारतम्य बनाए रखती है। इस उपन्यास की सब कहानियां अंत में एक शिक्षा जरूर देती है, जिसमें पाठक स्वयं मानवीय अनुभव ग्रहण कर लेता है। ये कहानियां सरल तो है, पर मार्मिक और विचारोत्तेजक प्रतिबिंब दर्शाती है, जो इसे पढ़ने योग्य, रोचक और आकर्षक बनाती है। पाठक की उत्सुकता बनी रहती है कि आगे कहानी में क्या होगा? या ऐसा होने की जगह, यह होता तो ठीक रहता। लियाकत मंसूरी का पूरा उपन्यास निबंधात्मक शैली में लिखा गया है, उपन्यास में जिन कहानियों को भी लिखा है, उसमें प्यार और नुकसान तो है ही, साथ ही प्यार की गहराई और उसे खोने के दर्द भी पता लगता है। रिश्तों की जटिलताओं और हमारे जीवन को आकार देने वाले मानवीय संबंधों पर प्रकाश डालते हुए पाठक को भावनात्मक यात्रा पर ले जाता है। साथ ही इनकी कहानियां जीवन के उतार-चढ़ाव की खोज करती है। यह कहानियां आत्म-खोज भी करवाती है, जिसमें शहनाज़ के चरित्र के माध्यम से लेखक आत्म-खोज और व्यक्तिगत विकास के विषयों पर भी दृष्टि डालते हैं। कहीं-कहीं पर काव्यात्मक भाषा शैली लेखक द्वारा लिखे संवादों को उच्च बनाती है तो कही विचारोत्तेजक शैली इसे पढ़ने में सुंदर और अभिव्यंजक बनाती है।

बड़ी कुशलता के साथ कहानियों को बुना

यह उपन्यास लघु कहानियों और निबंधों का समान्तर संग्रह है, जो प्रेम, रिश्तों और मानवीय भावनाओं के विषयों का पता लगाता है। ‘मेरी कहानी और शहनाज़’ शीर्षक लेखक के जीवन को शहनाज़ के चरित्र के साथ जोड़ता है। उपन्यास को पढ़ते-पढ़ते‌ बाद‌ में पता चलता है कि शहनाज़ कौन है? यह पुस्तक मानवीय अनुभव है तो दिल दहला देने वाली और विचारोत्तेजक खोज भी है। यह प्रेम, हानि और लालसा के साथ मानवीय व्यवहार की जटिलताओं को भी उजागर करती है। शहनाज़ से गहरे संबंध निभाते हुए लेखक ने बड़ी कुशलता से अलग-अलग कहानियों को एक बड़ी कहानी के रूप में बुना है, जो पाठक के दिलों को झकझोर देती है, जिससे “मेरी कहानी और शहनाज़” उन लोगों के लिए एक दिलचस्प किताब बन जाती है, जिन्होंने कभी प्यार और नुकसान की गहराइयों का अनुभव किया है।

पाठकों को अंत तक अपनी सी लगेगी कहानियां

पत्रकार से लेखक बनें लियाकत मंसूरी उपन्यास में एक ऐसी कथा बुनते हैं, जो व्यक्तिगत और सार्वभौमिक दोनों है, जो पाठकों को भावनाओं और अनुभवों की दुनिया में खींचती है। “मेरी कहानी और शहनाज़” प्रभावी शीर्षक है, जो किसी भी व्यक्ति को पढ़ने के लिए प्रेरित करती है। मेरा मानना है, हर जीवन एक कहानी ही तो है और कहानियों को जानना, उनमें अपनी व अपनों की जिदंगी की कहानी से साम्यता बैठाना पाठकों को अच्छा लगता है। इस उपन्यास में भी जीवन और प्रेम के उतार-चढ़ाव का अनुभव होते है। इसमें लिखी कहानियां प्रारंभ से लेकर अंत तक पाठक को अपनी सी लगेगी।

उपन्यास की कहानियों के बारे में

पहली कहानी:- बुंदु का कुत्ता जुम्मन की चिलम है, जिसमें एक कुत्ते द्वारा चिलम टूटने से दो परिवारों में जो रंजिश हुई, उसमें कई हत्याएं हुईं। ये कहानी ग्रामीण क्षेत्र की है, जिसमें देवर-भाभी के बीच अवैध संबंधों को जिस तरीके से दर्शाया गया है, वह बताता है कि कैसे रिश्ते दरकते हैं। लेखक ने एक भ्रष्ट अधिकारी के चरित्र को इस कहानी में लिखा है, कैसे भ्रष्ट सब इंस्पेक्टर लालच में कई हत्याएं करवा देता है। भ्रष्ट दरोगा एक दिन अपने पुत्र के साथ सड़क दुर्घटना में मारा जाता है। हालांकि, अच्छे पुलिसकर्मी भी होते हैं, यह भी इस कहानी में बताया गया है। लेखक ने अंत में बताया है कि कैसे मजलूमों की हाय नहीं लेनी चाहिए। 

दूसरी कहानी:- क्योंकि सड़क नहीं बख्शती, एक ऐसे युवक की दास्तां है, जो फौज में जाना जाता था, लेकिन मीडिया की चकाचौंध देख पत्रकार बन बैठा। हाथों में थामनी थी बंदूक, थाम ली कलम। लेखक ने इस कहानी में बताया है कि कितने प्रकार के पत्रकार पाए जाते हैं, हर पत्रकार की अलग-अलग श्रेणी इस कहानी में दर्शायी गई हैं। ये स्टोरी एक अपराध जगत पर लिखने वाले पत्रकार की है। क्राइम पत्रकारिता पर कैसी हनक सवार रहती है, जो बाद में महत्वपूर्ण शिक्षा देती है।

तीसरी कहानी:- महजबीं, एक बाल शोषण पर प्रहार करती है। बहुत बारीकी से लेखक ने बाल अपराध को इस कहानी में उठाया है। जो माता-पिता अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते, उन बच्चों का कैसे शोषण होता है, यहीं इस कहानी में दर्शाया गया है। यह कहानी बहुत सुंदर गढ़ी गई है। इस पर फिल्म निर्माण भी संभव‌ है।

चौथी कहानी:- चीरहरण, एक ऐसी युवती की कहानी, जिसका चरित्र शादी से पहले पाक था, लेकिन पति शराबी निकला तो उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। कहानी में दर्शाया गया है कि एक मां खुद भुखी रह सकती है, लेकिन बच्चों को भूखा नहीं देख सकती। एक बार कदम बहके तो बहकते ही गए। प्रेमी के हाथों पति की हत्या करवा दी। ये कहानी पति, पत्नी और वो का ऐसा कॉकटेल है, जो बहुत कुछ सोचने और समझने पर विवश करता है। समाज को भी जागरूक करती है ये कहानी, कि पति-पत्नी के बीच जब तीसरे की एंट्री होती है तो कैसे अपराध का जन्म होता है।

पांचवी कहानी:- तलाक, भले की तीन तलाक पर कानून बन गया हो, लेकिन तलाक का अभिशाप अभी भी मुस्लिम महिलाओं का पीछा नहीं छोड़ रहा। छोटी छोटी बातों पर तलाक दे देना गलत है, लेखक ने कैसे दंपत्ति को आपस में मिलाया और शरीयत का हवाला दिया, ये काबिले तारीफ है। लेखक ने इस कहानी में तलाक के आंकड़े, सरकार का पक्ष और कोर्ट का हवाला अपने शब्दों में बेहतरीन तरीके से नाप तौल कर लिखा है।

छठी कहानी:- इस उपन्यास की महत्वपूर्ण कहानीकड़वाहट है, जो भले ही बड़ी है पर चकाचौंध की दुनिया के विषय पर सोचने को मजबूर कर देती है। कैसे नवयुवती के मॉडलिंग में एक अवार्ड पाने के लिए कदम बहक जाते हैं, और वह अपराध के दल-दल में फंसती ही जाती है। इस कहानी के कई आयाम को लेखक ने बताया है कि जो मां-बाप जवान बेटियों पर गौर नहीं करते, उन्हें आजादी देते हैं, और इस आजादी का कैसे युवा नाजायज फायदा उठाते हैं, ये लेखक ने बताया है। दो लड़कियों के बीच पनपे समलैंगिक रिश्ते, भाई-बहन के बीच पैदा हुए टकराव, घर से भागकर अलग दुनिया बसाने वाले प्रेमी युगल की ये कहानी है। रिश्तों में जब कड़वाहट पैदा होती है, तो कैसे अपराध जन्म लेता है, इस कहानी का मूल है। इस कहानी पर फिल्म निर्माण तक संभव है।

वही मेरी नसीब में नहीं थी वो, दंगा भी बेहतरीन कहानी है। मेरी कीमत, मिट्टी डाल दो मासूम प्रेम कहानियां है। तो वही भटकती आत्माएं अंधविश्वास से भरी है। यह इशारा भी है कि समाज में अब तक अंधविश्वास का चलन है, जिसमें साक्षरजन भी सोचने पर विवश हो जाते हैं कि कही यह बीमारी सच में तो ऊपरी बाधा के कारण नहीं थी।

सरल नहीं होता एक पत्रकार का जीवन

लियाकत मंसूरी अपने विचारोत्तेजक और भावनात्मक रूप से गूंजने वाले कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई उपन्यास लिखे हैं। उनका पहला उपन्यास था मुझे उड़ने दो जो ऑनर किलिंग पर लिखा गया। छू लियां आसमां, जिंदगी एक जहर और अब ‘मेरी कहानी और शहनाज’। ‘मेरी कहानी और शहनाज’ उनके पत्रकार के रूप में यह भी बताती है कि पत्रकार का जीवन उतना भी सरल नहीं जितना समझ लिया जाता है। एक पत्रकार समय-समय पर संवेदनात्मक भावनाओं के ज्वार को जीता है।

शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को किया समर्पित

एक वरिष्ठ पत्रकार, सहयोगी स्वभाव व अपनेपन का भाव श्री मंसूरी के मानवीय स्थिति भी दर्शाता है। उन्होंने यह उपन्यास यूपी के मथुरा स्थित जवाहरबाग कांड में शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को समर्पित किया है, यह दर्शाता है कि वह अपने सभी मिलने जुलने वालों से हृदय से रिश्ते निभाते हैं। उनके कार्यों को पाठकों और आलोचकों ने समान रूप से पसंद किया है, जिससे उन्हें साहित्यिक हलकों में महत्वपूर्ण अनुयायी प्राप्त हुए हैं।

लियाकत मंसूरी के बारे में

लियाकत मंसूरी की पैदाइश जनपद मेरठ (उप्र) के छोटे से गांव बातनौर में हुई। पत्रकारिता की शुरूआत उन्होंने देहात क्षेत्र से की। लेखक बनने की चाह बचपन से ही थी, उन्हें लगा देहात क्षेत्र में रहते हुए सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता, तब उन्होंने मेरठ का रूख किया। मेरठ, झांसी, बांदा, देहरादून में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कई समाचारपत्रों में विभिन्न पदों पर काम किया। लियाकत मंसूरी अब मेरठ में दैनिक भास्कर से जुड़े हुए हैं।

उनका ख्वाब हमेशा पत्रकारिता से साहित्य की ओर रहा, इसलिए हमेशा मन में कुछ न कुछ आता रहा। लॉकडाउन के दौरान विचार आया कि सच्ची घटना पर ही उपन्यास लिखा जाए। अंतत: उन विचारों, भावनाओं एवं कल्पनाओं ने मूर्त रूप ले ही लिया। हिंदी में उनका पहला उपन्यास “मुझे उड़ने दो” जिसे मार्च 2023 में प्रकाशित किया जा चुका है। अब उनका दूसरा उपन्यास ‘मेरी कहानी और शहनाज’ आया है, जिसमें उन्होंने 11 कहानियों का संग्रह है।

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