कृष्ण-सुदामा चरित्र दिखाता है कि मित्रता कैसे निभाई जाए: पंडित विनय
लोकतंत्र भास्कर
मेरठ। आभा मानव मंदिर वरिष्ठ नागरिक सेवा सदन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान के सातवें दिन कथा व्यास पंडित विनय शास्त्री ने श्री कृष्ण की मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया।
देवकी के छह पुत्रों को वापस देना, मार्मिक सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया गया। सुदामा भगवान श्री कृष्ण के घनिष्ठ बाल सखा थे एवं भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन करते थे। गरीब होने पर भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते और संतुष्ट रहकर ईश्वर का धन्यवाद करते। पत्नी सुशीला सुदामा से बार-बार आग्रह करती कि द्वारकाधीश आपके मित्र हैं, आप एक बार उनसे जाकर मिलो, वे हमारी मदद अवश्य करेंगे। बस आपको एक बार कहने की देर है। सुदामा पत्नी के बार-बार कहने पर द्वारका पहुंचते हैं, जब द्वारपाल भगवान श्री कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है तो कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगाते हैं। एससी गोविल एवं कुणाल दीक्षित का कथा व्यास ने माला पहनकर स्वागत किया।