पुलिस के तहरीर लौटाने पर भड़के परिजन, रात नौ बजे दर्ज हुई एफआईआर
बदायूं। जवाहरपुरी चौकी के पास सड़क पर करीब चार घंटे चले हंगामे के बाद अफसरों को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा। मृतक के बेटे संदीप सिंह की ओर से दी गई तहरीर पर रात में करीब नौ बजे सदर कोतवाली में आरोपी नायब तहसीलदार व लेखपाल समेत पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद परिवार वाले शांत हुए और शव उठाकर ले गए। कहीं तब जाकर माहौल शांत हुआ।
शहर से सटे नगला शर्की निवासी रूम सिंह ने गुरुवार को सदर तहसील परिसर में जहर खा लिया था। उसे बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां गुरुवार रात उनकी मौत हो गई। वहां पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे नगला शर्की उनके घर लाया गया। बेटे संदीप का कहना है कि सूचना मिलने के बाद वह जिला अस्पताल पहुंचे तो उनके पिता रूम सिंह बातचीत कर रहे थे। उन्होंने सदर तहसील के एक लेखपाल व नायब तहसीलदार का नाम लेते हुए उन्हें अपनी आत्महत्या के लिए दोषी बताया था। रूम सिंह की जेब में सुसाइड नोट भी निकला। उसमें भी लेखपाल व नायब तहसीलदार से न्याय न मिलने से आत्महत्या करने की बात लिखी है। परिवार वालों का कहना है कि रूम सिंह ने सदर तहसील के लेखपाल व नायब तहसीलदार की वजह से आत्महत्या की। इसलिए वह उनके खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखाना चाहते थे।
बदायूं। तहसील परिसर में किसान के जहर खाकर जान देने पर परिजनों ने किया रोड जाम, नायब तहसीलदार व लेखपाल सहित पांच पर दर्ज हुई एफआईआर pic.twitter.com/sarxhPAghD
— LOKTANTRA BHASKAR (@LOKTANTRABHASKR) June 23, 2023
रूम सिंह के परिवार वाले शाम करीब सवा चार बजे तहरीर लेकर सदर कोतवाली पहुंचे। उस वक्त सिटी मजिस्ट्रेट ब्रजेश सिंह, सीओ सिटी आलोक मिश्रा, एसडीएम सदर एसपी वर्मा, सदर कोतवाल राजीव तोमर, सिविल लाइन इंस्पेक्टर गौरव विश्नोई जवारपुरी चौकी में मौजूद थे। इसलिए सदर कोतवाली में मौजूद इंस्पेक्टर क्राइम ने साहंसर वीर सिंह ने रूम सिंह के परिजनों को जवाहरपुरी पुलिस चौकी भेज दिया। परिजन जवाहरपुरी चौकी पहुंचे तो वहां मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी ने तहरीर से नायब तहसीरदार का नाम हटाने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में डीएम की ओर से जांच एडीएम प्रशासन को दी गई है। नायब तहसीलदार दोषी होंगे तो एडीएम की जांच के आधार पर विवेचना में नाम बढ़ जाएगा। वहां मौजूद पूर्व राज्यमंत्री आबिद रजा एवं भाजपा नेता तीर्थेंद्र पटेल ने भी समझाने की कोशिश की। मगर परिजनों ने अफसरों की एक नहीं सुनी और हंगामा शुरू करते हुए चौकी से निकल गए।
