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Saturday, April 5, 2025
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मथुरा में बलदेव हुरंगा उत्सव में श्रद्धालुओं के साथ बर्बरता, पुलिस जांच में जुटी

मथुरा। जिले के बलदेव क्षेत्र में 15 मार्च 2025 को आयोजित विश्व प्रसिद्ध हुरंगा उत्सव उस समय विवादों में घिर गया, जब मंदिर के सेवादारों पर श्रद्धालुओं के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा। यह घटना बलदेव के प्रसिद्ध दाऊजी मंदिर में हुई, जहां हर साल होली के बाद हुरंगा उत्सव का आयोजन होता है। इस उत्सव में भाग लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार उत्सव की खुशी उस समय मातम में बदल गई, जब श्रद्धालुओं पर लात-घूंसे और बाल्टियों से हमला किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हुरंगा खेलने के लिए मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ सेवादारों ने पहले परंपरागत रूप से रंग और पानी से होली खेलना शुरू किया। लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई, जब कुछ सेवादारों ने कथित तौर पर श्रद्धालुओं पर हमला बोल दिया। आरोप है कि सेवादारों ने न केवल हाथापाई की, बल्कि बाल्टियों का इस्तेमाल हथियार की तरह करते हुए श्रद्धालुओं को पीटा। इस घटना में कई श्रद्धालुओं को चोटें आईं, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
यह घटना तब सुर्खियों में आई, जब भारत समाचार ने इसकी रिपोर्ट प्रसारित की। खबर के वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैलने लगे, जिसमें सेवादारों को श्रद्धालुओं के साथ मारपीट करते देखा जा सकता है। लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मथुरा के SP ग्रामीण त्रिगुण विशेन ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और मारपीट में शामिल लोगों को चिन्हित करने का काम जारी है। SP ने कहा, “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस ने मंदिर परिसर में मौजूद CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर जांच तेज कर दी है।
हुरंगा उत्सव और उसकी परंपरा
हुरंगा उत्सव ब्रज क्षेत्र की एक अनूठी परंपरा है, जो होली के बाद दाऊजी मंदिर में मनाई जाती है। इस उत्सव में श्रद्धालु और सेवादार एक-दूसरे पर रंग और पानी डालते हैं, जो भगवान बलदेव (बलराम) और उनकी प्रिय राधा के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार, सेवादार श्रद्धालुओं पर रंग फेंकते हैं और श्रद्धालु इसे आनंद के साथ स्वीकार करते हैं। हालांकि, इस बार यह परंपरा हिंसा में बदल गई, जिसने इस पर्व की पवित्रता को ठेस पहुंचाई है।
घटना के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक श्रद्धालु ने बताया, “हम भक्ति भाव से यहां आए थे, लेकिन हमारे साथ ऐसा व्यवहार हुआ कि अब मन में डर बैठ गया है।” कई लोगों ने मांग की है कि मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और सेवादारों के व्यवहार पर निगरानी रखी जाए।
पुलिस की जांच के बाद यह साफ हो पाएगा कि यह घटना किसी विवाद का नतीजा थी या सेवादारों की मनमानी का परिणाम। फिलहाल, मथुरा पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना ने हुरंगा उत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। ब्रज की इस अनोखी परंपरा को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसे सिर्फ आस्था और उल्लास का प्रतीक बनाए रखा जाएगा, या फिर इस तरह की घटनाएं इसकी चमक को फीका कर देंगी। जांच के नतीजों का इंतजार सभी को है।

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