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Friday, April 4, 2025
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लोकतंत्र सेनानी अन्याय के खिलाफ बुलंद करें आवाज: डॉ उमेश गौतम

भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति ने आयोजित किया लोकतंत्र विजय दिवस


बरेली: भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को बरेली के सिविल लाइंस स्थित लाइंस विद्या मंदिर के सभागार में “लोकतंत्र विजय दिवस” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को सम्मानित करने और वर्तमान पीढ़ी को उनके बलिदान से प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस अवसर पर बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं से आए सैकड़ों लोकतंत्र सेनानियों ने भाग लिया, जिन्हें उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से संबोधित करते हुए बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम ने कहा, “लोकतंत्र की रक्षा में आपातकाल के योद्धाओं ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है। यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि इन सेनानियों ने तानाशाही के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवित रखा।” उन्होंने वर्तमान परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी समाज में अन्याय के खिलाफ चुप्पी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। डॉ. गौतम ने लोकतंत्र सेनानियों से आह्वान किया कि वे इस दौर में भी अपनी आवाज को बुलंद करें और अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करें। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूकता और सक्रियता दोनों जरूरी हैं।

प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र कुमार अटल ने बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन में आपातकाल के काले अध्याय को विस्तार से याद किया। उन्होंने कहा, “12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने आपातकाल की पटकथा लिख दी थी। इसके बाद 25 जून 1975 को तत्कालीन सरकार ने लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की, लेकिन लोकतंत्र सेनानियों के अथक संघर्ष ने इसे पुनर्जनम दिया।” उन्होंने बताया कि 2006 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने इन योद्धाओं को “लोकतंत्र रक्षक सेनानी” का सम्मान प्रदान किया था, जो उनके बलिदान का प्रतीक है। श्री अटल ने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आपातकाल के उस दौर की सच्चाई से परिचित होना चाहिए, ताकि वे लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा के प्रति सचेत रहें।

 

प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर लोकतंत्र सेनानियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र रक्षक सेनानियों ने देश को तानाशाही से मुक्ति दिलाई। उनके हितों की रक्षा के लिए मैं स्वयं मुख्यमंत्री से वार्ता करूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि उनकी समस्याओं का समाधान हो।” डॉ. अरुण कुमार ने सेनानियों के संघर्ष को देश के इतिहास का स्वर्णिम पन्ना बताते हुए कहा कि इनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 

कार्यक्रम संयोजक विनोद कुमार गुप्ता ने सभी लोकतंत्र रक्षक सेनानियों से अपील की कि वे वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की रक्षा केवल अतीत का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है। हमें आज भी अन्याय, भ्रष्टाचार और तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़ा होना होगा।” श्री गुप्ता ने जोर देकर कहा कि सेनानियों का अनुभव और प्रेरणा युवाओं के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।

 

कार्यक्रम की शुरुआत में वेद प्रकाश वर्मा, सतीश शर्मा, राजेंद्र बहादुर चौधरी, हरिप्रसाद सिंह पटेल, डॉ. वीरेंद्र कुमार, सुमंत महेश्वरी और राजेंद्र पाल सिंह ने महापौर डॉ. उमेश गौतम और प्रदेश मंत्री डॉ. अरुण कुमार का फूल-मालाओं और शॉल ओढ़ाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद अश्वनी कुमार, शाहजहांपुर के राधा कृष्ण, अशोक शम्स, रामप्रकाश शर्मा, डॉ. योगेश मिश्रा, महेश सक्सेना और बाबूराम गंगवार सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। सभी ने एक स्वर में लोकतंत्र की रक्षा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में जिला अध्यक्ष राजेंद्र बहादुर चौधरी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

यह कार्यक्रम न केवल आपातकाल के योद्धाओं को सम्मान देने का मंच बना, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जागरूकता फैलाने और वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। लोकतंत्र विजय दिवस ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत मूल्य है, जिसे हर पीढ़ी को संरक्षित और सशक्त करना होगा।

 

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