कला को प्रदर्शित करने के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी: प्रो. प्रशांत कुमार
लोकतंत्र भास्कर
मेरठ। एक्टिंग और एक्टर में अंतर होता है। एक कलाकार अपनी एक्टिंग के माध्यम से कल का प्रदर्शन करता है, अपने शरीर के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचता है। इसको हम आगे कल कहते हैं, जबकि बोली के माध्यम से अपने विचारों को दूसरों तक पहुंचाने का काम करते हैं। इसको हम वाचिक कल भी कहते हैं। यह बात तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल में चल रही सात दिवसीय कार्यशाला दूसरे दिन रवि कर्णवाल ने यह बात कही।
फिल्म मेकिंग कार्यशाला के दूसरे दिन रवि कर्णवाल ने बताया कि किसी भी फिल्म में डायलॉग बोलना भी एक कला है, हम किस प्रकार से डायलॉग बोल रहे हैं, हमारी आवाज कैसी है, एक एक्टर के लिए बहुत आवश्यक है। तिलक पत्रकारिता एवं जनसंचार स्कूल के निदेशक प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने कहा कि नाट्य शास्त्र में चार कलाओं के विषय में विस्तार से बताया गया है, एक कलाकार के लिए अपनी कला को प्रदर्शित करने के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी है। यदि हम एकाग्रता के साथ अपने डायलॉग नहीं बोलेंगे तो हम से गलती हो सकती है। इस अवसर पर डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, लव कुमार, दीपिका वर्मा, बीनम यादव, प्रशासनिक अधिकारी मितेंद्र कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।