
📍 ग्रामसभा आदमपुर भाषी, हसनगंज – उन्नाव
लोकतंत्र भास्कर | विशेष संवाददाता –
हसनगंज (उन्नाव)। ग्रामसभा आदमपुर भाषी से आजमखेड़ा को जोड़ने वाला मार्ग अब ग्रामीणों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। बारिश में यह रास्ता इतना बदहाल हो जाता है कि मोटरसाइकिल तो दूर, पैदल निकलना भी जोखिम भरा हो गया है।
🚧 दशकों से टूटी सड़क, जल निगम की खुदाई ने बिगाड़ा हालात
जहाँ एक ओर सरकार देशभर में सड़कों का जाल बिछाकर भारत को अमेरिका जैसा बनाने का सपना दिखा रही हैं, वहीं यह सड़क दशकों से खड़ंजा रूप में अधूरी और क्षतिग्रस्त स्थिति में है। कुछ महीने पूर्व जल निगम द्वारा पाइप लाइन की खुदाई के बाद हालात और बिगड़ गए।
सड़क पर गड्ढे, कीचड़ और पानी भरे रपटों ने आवागमन लगभग असंभव बना दिया है।
🛑 400 मीटर के लिए 4 किलोमीटर का चक्कर
ग्रामीणों को 500 मीटर की दूरी पार करने के लिए 3 से 4 किलोमीटर का चक्कर लगाकर जाजूमऊ पुलिया – दयालपुर होते हुए आजमखेड़ा पहुँचना पड़ता है। वाहन चालकों के लिए यह मार्ग पूरी तरह से अनुपयोगी हो गया है।
🏛️ जनप्रतिनिधि भी इस रास्ते से बचते हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी विधायक, नेता या प्रशासनिक अधिकारी ने वर्षों से इस रास्ते पर कदम तक नहीं रखा। सड़क की हालत ऐसी है कि कोई भी जनप्रतिनिधि यहाँ से गुजरने की हिम्मत नहीं करता।
🔴 सरकार पर ग्रामीणों का सीधा आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य सरकार को सत्ता में आए 10 साल हो गए, लेकिन इस सड़क की तरफ अब तक किसी का ध्यान नहीं गया।
👉 एक ग्रामीण ने कटाक्ष करते हुए कहा:
“शायद हमारी किस्मत की सड़कें सिर्फ कागज़ों में बनती हैं, असल ज़मीन पर तो हम गड्ढों में ही चलने को अभिशप्त हैं।”
❓ अब सवाल यह है…
क्या सरकार, प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक कभी इस “सड़कनुमा पीड़ा” को देख पाएंगे?
क्या 500 मीटर की यह टूटी सड़क कभी “विकास यात्रा” में शामिल हो सकेगी?
📌 लोकतंत्र भास्कर डिजिटल डेस्क | उन्नाव




