
सफीपुर-उन्नाव। क्षेत्र के गौरी गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य नीरज सरोज ब्रह्मचारी ने श्रोताओं को संबोधित किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि श्रीराम केवल एक महान राजा ही नहीं थे। उनके श्रेष्ठ कर्म और मर्यादित आचरण के कारण उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा जाता है। उन्होंने रामचरित मानस के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
श्रीराम ने जीवन में सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। आचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। ऐसे में राम के जीवन से प्रेरणा लेकर हम अपना जीवन सार्थक बना सकते हैं। कथा आयोजक संतोष कुमार त्रिवेदी ने बताया कि यह आयोजन पूरे गांव के लिए आध्यात्मिक उत्सव बन गया है।
रविवार को कथा समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इनमें अमित कुशवाहा, दीपक, अंशु त्रिवेदी, रामेंद्र द्विवेदी और जटाशंकर द्विवेदी, नन्हे विश्वकर्मा, नत्थू राठौर आदि प्रमुख थे। कथा के अंत में आचार्य ने भक्तों से श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति का अर्थ है अपने आचरण को शुद्ध करना और समाज के लिए उपयोगी बनना। कथा स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।




