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Sunday, March 8, 2026
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न्यूटीमा हॉस्पिटल में ब्रेस्ट फीडिंग वर्कशॉप, ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में बताया

लोकतंत्र भास्कर

मेरठ। गढ़ रोड स्थित न्यूटीमा हॉस्पिटल में वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक बनाया गया। जिसमें न्यूटीमा हॉस्पिटल के डायरेक्टर एंड हेड ऑफ़ पीडियाट्रिक्स एंड नोनटोलोग्य डिपार्टमेंट अमित उपाध्याय ने नर्सों के लिए वर्कशॉप की। ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में बताया, कैसे ब्रेस्ट फीडिंग करनी चाहिए, ब्रेस्ट फीडिंग में क्या क्या परेशानिया आती हैं? उनके निवारण में नर्सों का क्या योगदान रहता है? अथवा जिन माताओं को ब्रेस्ट फीडिंग करने में दिक्कतें आती हैं, उनके बारे में इस वर्कशॉप के माध्यम से सबको जानकारी दी गयी।

डॉ. अमित उपाध्याय ने बताया कि अपने बच्चे को पालन-पोषण और प्यार भरी देखभाल से बेहतर जीवन की शुरुआत देने का सबसे बेहतर तरीका माँ का स्तनपान करना है। यह बच्चों को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत प्रदान करता है। यह बच्चे के लिए पोषण का सबसे अच्छा और सबसे सस्ता स्रोत है, माँ और बच्चे के लिए आजीवन लाभ के साथ मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देता है। यह बच्चे की वृद्धि और विकास के लिए महत्वपूर्ण है और उनकी सुरक्षा की भावना और माँ के साथ जुड़ाव में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके बारे में लिखने के लिए विश्व स्तन पान सप्ताह से बेहतर समय क्या हो सकता है, जो अगस्त के पहले सप्ताह में विश्व स्तर पर मनाया जाता है। इस वर्ष का थीम है “स्तनपान में सभी माताओं को सम्पूर्ण सहायता देना: सभी रुकावटों को दूर करें” जिसके पीछे कार्यरत माताओं को काम के साथ स्तनपान करने का प्रोत्साहन व सहयोग मिल सके। कार्यस्थल पर सहकर्मीओं को भी इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि यदि कोई महिला कर्मी अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं या ब्रेस्टमिल्क एक्सप्रेस करना चाहे तो उन्हें एक सहयोगपूर्ण वातावरण प्रदान करें। सभी कार्यस्थल पर ब्रेस्टफीड कराने या ब्रेस्ट मिल्क एक्सप्रेस करने के लिए एक प्राइवेट व सिक्योर जगह होने चाहिए। दूध को स्टोर करने के लिए फ्रिज का प्रबंध हो। यह भी देखना होगा कि स्तन पान करने वाली कार्यरत माताओं के वर्किंग ऑवर थोड़े काम हो। कुल मिलकर हमें कार्यरत माताओं के लिए स्तनपान हेतु एक समावेशी वातावरण बनाना है।

जन्म के एक घंटे के भीतर करें स्तनपान की शुरुआत

न्यूटीमा हॉस्पिटल को नर्सों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. अमित उपाध्याय व डॉ. प्रियंका गुप्ता ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत, पहले छह महीनों के लिए विशेष स्तनपान, छह महीने में पोषण संबंधी पर्याप्त और सुरक्षित पूरक आहार की शुरुआत के साथ-साथ 2 साल या उससे अधिक उम्र तक स्तनपान जारी रखना संक्रमण के खिलाफ रक्षा की एक शक्तिशाली रेखा प्रदान करता है और पोषण व बच्चे में मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देता है।

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