लोकतंत्र भास्कर
मेरठ। हरिवंशपुराण की कथा के छठे दिन कथाव्यास प्रो. सुधाकराचार्य त्रिपाठी ने कथा में उषा और अनिरुद्ध के स्वागत में हुए द्वारिका के उत्सव का वर्णन किया। इसके साथ ही विष्णु पर्व समाप्त हुआ। भविष्य पर्व में पाण्डव वंश की प्रतिष्ठा, व्यास का आगमन, जनमेजय की जिज्ञासा और व्यास द्वारा काल की प्रबलता का विस्तृत वर्णन किया।
कलियुग की स्थिति, हरिवंशपुराण के पाठ का माहात्म्य, युगादि परिमाण, विष्णु की नाभि से कमल, उस पर ब्रह्मा, उनके कान के मैल से मधु-कैटभ की उत्पत्ति, विष्णु द्वारा उनका वध आदि प्रसंगों को सुनाया। योग, उनके ऐश्वर्य रूप विघ्नों को बताया। दक्ष के शरीर के दो भाग- स्त्री और पुरुष- से 60 कन्याओं के जन्म, ऋषि कश्यप आदि प्रजापतियों से उनके विवाह और वर्तमान सृष्टि का उल्लेख किया। डार्विन के सिद्धान्त को समझाया। पुष्कर में विष्णु आदि देवताओं की तपस्या, उसके फल से देवताओं के उत्कर्ष, समुद्र-मन्थन तथा राहु के शिरच्छेद, सूर्य और चन्द्र ग्रहण के वैज्ञानिक रूप की कथा हुई। जिन स्थलों पर अमृत छलका उनके वर्तमान स्थानों का तथा कुम्भ का उल्लेख किया। कल की कथा में देव-दानव-युद्ध और अग्नि की स्तुति होगी।