कानूनी कार्रवाई बाल विवाह के खात्मे की कुंजी: अनीता राणा
लोकतंत्र भास्कर
मेरठ। गैर सरकारी संगठन जनहित फाउंडेशन ने 2023 से अभी तक बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के दौरान 80 बाल विवाह रुकवाए। मौजूदा दर के हिसाब से बाल विवाह के लंबित मामलों के निपटारे में भारत को लग सकते हैं 19 साल। भारत में बाल विवाह के खात्मे में कानूनी कार्रवाइयों और अभियोजन की अहम भूमिका को उजागर करने वाली एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जनहित फाउंडेशन की निदेशिका अनीता राणा ने कहा कि कानूनी कार्रवाइयां और कानूनी हस्तक्षेप 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं और हमारे संगठन द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के दौरान 2023 से अभी तक जनपद मेरठ में 80 बाल विवाह रुकवाए हैं।
जनहित फाउंडेशन की निदेशिका अनिता राणा ने कहा, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की यह रिपोर्ट साफ तौर से कानूनी कार्रवाई और अभियोजन की अहमियत को रेखांकित करती है। हम लोगों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता के प्रसार के साथ यह सुनिश्चित करने के अथक प्रयास कर रहे हैं कि परिवारों और समुदायों को समझाया जा सके कि बाल विवाह अपराध है। साथ ही, जहां बाल विवाहों को रुकवाने के लिए समझाने बुझाने का असर नहीं होता, वहां हम कानूनी हस्तक्षेप का भी इस्तेमाल करते हैं। कानून पर अमल बाल विवाह के खात्मे की कुंजी है और हम सभी को साथ मिलकर इस पर अमल सुनिश्चित करने की जरूरत है। आईसीपी, बाल विवाह मुक्त भारत का गठबंधन सहयोगी है जिसने 2022 में राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की और इसके 200 सहयोगी संगठन भुवन ऋभु की बेस्टसेलर किताब ह्ल व्हेन चिल्ड्रेन है। चिल्ड्रेन-टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में सुझाई गई कार्ययोजना पर अमल करते हुए पूरे देश में काम कर रहे हैं।
59,364 बाल विवाह रुकवाए
सीएमएफआई अपने कामकाज में मुख्य रूप से कानूनी हस्तक्षेपों और परिवारों एवं समुदायों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाने बुझाने के उपायों का इस्तेमाल करता है। सीएमएफआई के सहयोगी संगठनों ने कानूनी हस्तक्षेपों की मदद से 2023-24 में 14,137 और पंचायतों की मदद से 59,364 बाल विवाह रुकवाए।