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Sunday, March 8, 2026
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पत्रकारिता जगत में सहारा की सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकता: अब्दुल माजिद निज़ामी

पत्रकारिता जगत में सहारा की सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकता: अब्दुल माजिद निज़ामी

-सीसीएसयू के उर्दू विभाग में साहित्य के अंतर्गत “राष्ट्रीय सहारा की उर्दू सेवाएं” विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया

लोकतंत्र भास्कर

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और आयुसा द्वारा आयोजित साप्ताहिक ऑनलाइन कार्यक्रम ‘अदबनुमा’ के अन्तर्गत “राष्ट्रीय सहारा की उर्दू सेवाएँ” विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं सहारा न्यूज़ नेटवर्क के समूह संपादक अब्दुल माजिद निज़ामी ने कहा कि सहारा ने उर्दू भाषा में जनता की सेवा करना पसंद किया। राष्ट्रीय सहारा की सेवाओं की पूरे देश में सराहना होती है और कई संस्करणों के कारण यह अखबार आज उर्दू का एक आंदोलन बन गया है। इस अखबार की वजह से कई लोगों की सोच में फर्क आया है। मीडिया में आज के बड़े चेहरों ने सहारा से ही सीखा है। पत्रकारिता जगत में सहारा के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

कार्यक्रम की शुरुआत सईद अहमद सहारनपुरी ने पवित्र कुरान की तिलावत से की। कार्यक्रम का आयोजन उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने किया। संचालन डॉ. आसिफ अली, स्वागत डॉ. अलका वशिष्ठ और आभार डॉ. इरशाद स्यानवी ने किया। डॉ. साजिद अली [गाज़ियाबाद] और नज़राना [पाकिस्तान] ऑनलाइन ने शोध लेखक के रूप में भाग लिया। लखनऊ से आयुसा की अध्यक्षा प्रोफेसर रेशमा परवीन, प्रसिद्ध शायर डॉ. मोइन शादाब और प्रसिद्ध पत्रकार डॉ. अता इब्ने फितरत ने ऑनलाइन भाग लिया। इस मौके पर उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि दैनिक राष्ट्रीय सहारा से पहले दिल्ली में एक “कौमी आवाज” अखबार हुआ करता था, जिसकी सेवाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके अलावा “इंकलाब” मुंबई, सालार, मुंसिफ, क़ोमी ख़बर, अख़बार मशरिक आदि की उर्दू सेवाएं रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय सहारा एक ऐसा अख़बार है जिसके लगभग अठारह संस्करण हैं। यह वास्तव में एक अखबार है जो हमारी खबरों को दूर-दूर तक पहुंचाता है। इस अखबार ने उर्दू का मान बढ़ाया है. इसमें कोई शक नहीं कि आज भी राष्ट्रीय सहारा की उर्दू पाठकों पर अच्छी पकड़ है। कार्यक्रम से डॉ. शादाब अलीम, सैयदा मरियम इलाही, मुहम्मद शमशाद आदि ऑनलाइन व ऑफलाइन जुड़े रहे।

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