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Sunday, March 8, 2026
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हार्ट फ़ेल्यर से 7-17% रोगियों की एक वर्ष के भीतर होती है मृत्यु: डा. मलिक

हार्ट फ़ेल्यर से 7-17% रोगियों की एक वर्ष के भीतर होती है मृत्यु: डा. मलिक

लोकतंत्र भास्कर

मेरठ। ह्रदय शरीर में समुचित मात्रा में रक्त संचालन के लिए आवश्यक एक पम्प का कार्य करता है। कुछ बीमारियों की वजह से ह्रदय की माशपेशियों में कमज़ोरी के कारण ह्रदय में फैलाव होकर इसका आकार बढ़ जाता है एवं इसकी पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है, ह्रदय की इस पम्पिंग क्षमता के कमज़ोर पड़ जाने की स्थिति को हार्ट फ़ेल्यर कहा जाता है। इस स्थिति में जहाँ एक तरफ़ शरीर के अंगों में समुचित रक्त प्रवाह की कमी हो जाती है, वहीं दूसरी ओर फेफड़ों एवं लिवर में अतिरिक्त बैक प्रेशर की स्थिति उत्पन हो जाती है और उनकी कार्य क्षमता कम हो जाती है।

डा. अमित मलिक (निदेशक, ह्रदय रोग विभाग, मैक्स अस्पताल वैशाली, ग़ाज़ियाबाद) के अनुसार प्रतिवर्ष लाखों रोगी हार्ट फ़ेल्यर से ग्रसित होते हैं। इस स्थिति की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि लगभग 1%  जनसंख्या इस बीमारी से ग्रसित है और 7-17% रोगियों की मृत्यु एक वर्ष के भीतर हो जाती है। हार्ट फ़ेल्यर के मरीज़ को बार-बार अस्पताल में दाख़िल करने की आवश्यकता पड़ती है, इससे मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता एवं कार्यशैली पर गम्भीर प्रभाव पड़ता है।

लक्षण- चलने में साँस फूलना, पैरों पर सूजन, जल्दी थकान एवं नब्ज़ की अनियमितता हार्ट फ़ेल्यर के प्रमुख प्रारम्भिक लक्षण हैं। बीमारी की एडवांस स्थिति में पेट पर सूजन, भूख ना लगना एवं लेटने में साँस फूलना प्रमुख लक्षण हैं। लम्बे समय से खांसी विशेषत लेटने की अवस्था में हार्ट फेलियर का लक्षण हो सकता है, इसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए।

कारण-  ह्रदय के वाल्व की बीमारी, अनियंत्रित नब्ज़ एवं रक्तचाप,  ह्रदय की मांसपेशी की सूजन के अलावा पुराने हार्ट अटैक की वजह से ह्रदय की मांशपेशियों की कमज़ोरी हार्ट फ़ेल्यर के प्रमुख कारण हैं। कोरोना के कारण भी मरीज़ों में वाइरल मायोकार्डिटिस (मांसपेशी की सूजन) की पुष्टि हुई है। गुर्दे एवं फेफड़े के पुराने रोग, अल्कोहोल का अत्याधिक सेवन एवं केन्सर उपचार की कुछ कीमोथेरापी दवाइयाँ भी ह्रदय की माँसपेशियों को कमज़ोर करके हार्ट फ़ेल्यर का कारण बनती हैं। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान ह्रदय की माँसपेशियों पर सूजन आने के कारण हार्ट फ़ेल्यर की स्थिति बनती है।

निदान एवं उपचार- इकोकारडीयोग्राफ़ी एक प्रारंभिक टेस्ट है जो ह्रदय की पम्पिंग क्षमता के साथ वाल्व की बीमारियों का पता लगाने में सहायक है। इसके अलावा हॉल्टर मॉनिटरिंग, एंजीयोग्राफ़ी एवं कुछ रोगियों में कार्डीयक एमआरआई की आवश्यकता पड़ती है।

नियमित समय पर चिकित्सा जाँच-  उच्च रक्तचाप, मधुमेंह, कोलेस्टेरोल एवं ह्रदय गति को नियमित करने में सहायक दवाएँ हार्ट फ़ेल्यर को नियंत्रित करने में मदद कारी होती हैं। ह्रदय के वाल्व की बीमारी के लिए वाल्व की सर्जरी एवं धमनियों की ब्लोकेज के लिए एंजीयोप्लास्टी / बाइपास सर्जरी की आवश्यकता होती है। कुछ मरीज़ों में एक विशेष प्रकार के पेसमेकर (सीआरटी) से ह्रदय की पम्पिंग क्षमता एवं जीवन की गुणवत्ता को सुधारने में सहायता मिलती है।

कर्त्रिम ह्रदय ( आर्टिफ़िशल हार्ट) एवं हार्ट ट्रांसप्लांट हार्ट फ़ेल्यर की एडवांस  स्थिति के लिए आरक्षित उपचारों में से एक हैं। प्रारम्भिक अवस्था में निदान, रिस्क फ़ेक्टर्स का नियंत्रण एवं समय पर प्रभावी उपचार की मदद के हार्ट फ़ेल्यर के रोगी एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

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